गुजरात चुनाव डायरी- एक अकेले पुजारी के लिए क्यों बनता है स्पेशल पोलिंग बूथ?

गुजरात के ऊना विधानसभा क्षेत्र के बानेज गांव में फिर एक स्पेशल पोलिंग बूथ बन रहा है. इस पोलिंग बूथ पर एक ही मतदाता को वोट देना है, जो गिर वनों में स्थित लाइन सफारी के बीच बने एक मंदिर का पुजारी है. उस पुजारी को वोट दिलाने के लिए पिछले तीन चुनावों से दो पुलिसकर्मी और चार मतदानकर्मी उस भीषण जंगल में जाते हैं और इलेक्शन ड्यूटी करवा कर लौटते हैं. अपने लिए इस स्पेशल ट्रीटमेंट से खुश वह पुजारी हर साल पत्रकारों को बयान देता है.

सवाल यह है कि एक अकेले पुजारी के लिए अलग से पोलिंग बूथ क्यों बनता है? यह सच है कि सामान्य परिस्थितियों में चुनाव आयोग का यह नियम है कि किसी वोटर को वोट देने के लिए अधिकतम दो किमी दूरी तय करनी पड़े. हालांकि इसमें भी पहाड़ी इलाकों के लिए और बीहड़ जंगलों के मामले में छूट है. छूट कितनी है, यह नहीं बताया गया है.

नियम की बात अपनी जगह मगर क्या चुनाव आयोग को व्यावहारिक तरीके से नहीं सोचना चाहिए. एक वोटर को वोट डलवाने के लिए अगर छह लोगों को इंगेज किया जाये और अच्छी खासी रकम खर्च की जाये, तो क्या यह ठीक नहीं होगा कि इसके बदले वोटर को ही किसी दूसरे इलाके में वोट देने के लिए वाहन भेजकर बुलवा लिया जाये? नियम को लेकर हम इतने स्ट्रिक्ट हो जाते हैं, कि कई दफा तार्किक रूप से सोचना बंद कर देते हैं.

फिर हिंदू-मुसलमान होने लगा विकास प्रदेश में

मोदी जी ने गुजरात को उसके शानदार विकास के लिए देश भर में मशहूर कर दिया है. मगर दिक्कत यह है कि इस बार गुजरात का वोटर विकास की बात से सहमत नजर नहीं आ रहा. लिहाजा अब वहां भी साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण का खेल शुरू हो गया है.

ताजा मामला एक वीडियो का है, जिसमें एक लड़की मुसलमानों के मोहल्ले से अजान के बीच सहमी हुई गुजरती नजर आती है. वह अपने घर आती है तो उसके अभिभावक परेशान दिखते हैं. फिर वह कहती है, डरो मत ये कुछ नहीं कर पायेंगे. इसके बाद एक संदेश आता है, हमारा वोट ही हमारी सुरक्षा है.
रोचक है कि इस वीडियो में जारी करने वाले का नाम नहीं है. चुनाव आयोग को इस वीडियो के बारे में शिकायत की गयी है और आयोग ने उसकी जांच करने के आदेश दे दिये हैं.

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