क्योंकि हर एक कार्ड जरूरी होता है…

ये हैं सरजू मुसहर. अररिया जिले के रानीगंज ब्लॉक के बगुलहा गांव के बाशिंदा हैं. कमाते कुछ नहीं हैं, इनकी आर्थिक हैसियत इनके तसवीर से नजर आ रही है. मगर इन्होंने पैन कार्ड बनवा रखा है. अब आप सोचेंगे कि भला जिस व्यक्ति की कमाई से उसकी रोज की रोटी का इंतजाम नहीं हो पा रहा हो, वह भला इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की तरफ से जारी होने वाला पैन कार्ड क्यों बनवायेगा? सवाल आपका जायज है, मगर रानीगंज के बैंक अधिकारियों को यह बात समझ नहीं आती. उन्होंने फरमान जारी कर रखा है कि बिना आधार कार्ड और पैन कार्ड के बैंक का खाता नहीं खुल सकता. इसलिए सरजू मुशहर ने पैन कार्ड, आधार कार्ड समेत जितने तरह के सरकारी कार्ड थे सब बनवा लिये हैं. ताकि उनका बैंक में खाता खुल सके. जहां राशन लेकर पेंशन तक का सरकारी पैसा पहुंचेगा.

सामाजिक कार्यकर्ता उज्ज्वल को मिले सरजू ने उन्हें बताया कि उनके गांव के दो सौ से अधिक लोगों ने इसी तरह डेढ़ से दो सौ रुपये देकर पैन कार्ड बनवाये हैं. इनमें से ज्यादातर बीपीएल श्रेणी में आते हैं. पैन कार्ड का इस्तेमाल इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने में किया जाता है यह बात उन्हें नहीं मालूम. उन्हें तो सिर्फ इतना पता है कि अब बैंक में खाता बिना पैन कार्ड के नहीं मिलता. ऐसा रानीगंज के इंद्रपुर बड़हरा स्थित इलाहाबाद बैंक के कर्मचारियों ने कहा था.

डेली मेल पर छपा यह ग्राफिक्स वहां से साभार

दिलचस्प है कि पैन कार्ड बनवाने और बैंक में खाता खुलवाने के बावजूद सरजू मुशहर को पिछले 16 महीने से वृद्धा पेंशन नही मिल रहा है. इस इलाके में किसी भी व्यक्ति को वृद्धा पेंशन नहीं मिल रहा. क्योंकि स्थानीय प्रशासन ने जानकारी अपडेट करने पटना नहीं भेजा है. दो सौ रुपये खर्च करके पैन कार्ड बनवाने वाले सरजू अब इस कार्ड को देख-देख कर कुढ़ते हैं. उन्हें लगता है कि गरीबी की हालत में बेवजह इतना पैसा खर्चा हो गया. मगर सरकारी प्रक्रिया अपने रफ्तार से चल रही है. उसे सरजू के जीवन के संकट की बहुत फिक्र नहीं है.

इन दिनों बिहार के गांव के लोगों का जीवन इन्हीं कार्डों और सर्टिफिकेटों के इर्द-गिर्द घूम रहा है. राशन कार्ड से लेकर मतदाता कार्ड तक, आधार कार्ड से लेकर पैन कार्ड तक. बैंक खाता, बीपीएल कार्ड, मनरेगा का जॉब कार्ड और तो और कुछ लोग तो पासपोर्ट तक बनवा लेते हैं, कि कब दुबई जाने का ऑफर मिल जाये. हर कार्ड को बनवाना एक अभियान की तरह होता है. बनाने वाला जरूरत से अधिक पैसे वसूलना चाहता है. लोग कर्ज लेकर भी ये कार्ड बनवा रहे हैं. क्योंकि सरकार की योजनाओं के लाभ के लिए इन तमाम कार्डों की जरूरत है. एक देश-एक टैक्स के जमाने में गांव के सीधे-साधे लोग एक देश 15 कार्ड के हालात का मुकाबला कर रहे हैं. उनसे जूझ रहे हैं. क्योंकि हर एक कार्ड जरूरी होता है.

(इस स्टोरी के लिए और तसवीर के लिए हम उज्ज्वल के आभारी हैं.)

 

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