क्या मानव तस्करी से निबटने में सक्षम होगा यह नया बिल

बिहार कवरेज

होली से ठीक पहले भारत सरकार की कैबिनेट ने एक महत्वपूर्ण बिल को संसद में पेश करने के लिये स्वीकृति दी है. यह बिल मानव तस्करी से संबंधित है. Trafficking of person (prevention, protection and rehabilitation) bill, 2018 नामक यह बिल इसलिये महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके जरिये पहली दफा मानव तस्करी के सभी पहलुओं को समेटते हुए इसके समयबद्ध जांच, सुनवाई और पुनर्वास की बात की गई है.

बिहार में बाल अधिकारों के लिये कार्य करने वाले सुरेश प्रधान ने इस बिल को लेकर खुशी जाहिर की है. वे कहते हैं, बिल के प्रावधानों को देखकर यह समझ आता है कि सरकार इस दिशा में गंभीर है. पहली दफा इस बिल के जरिये यह तय किया गया है कि मानव तस्करी के दोषियों को 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक कि सजा सुनाई जा सकती है.

एनआईए के तहत एक एन्टी ट्रेफिकिंग ब्यूरो शुरू किए जाने का प्रस्ताव इस बिल में शामिल किया गया है. और भी कई महत्वपूर्ण प्रावधान इस बिल में शामिल हैं.

मानव तस्करी की पहचान दुनिया के तीसरी सबसे बड़े संगठित अपराध के तौर पर होती है. भारत के कई इलाके इस अपराध की चपेट में हैं. अब तक इस स्थित से निबटने के लिये हमारे पास कोई स्पष्ट कानून नहीं था. सरकार ने विभिन्न सरकारी विभागों और स्वयंसेवी संस्थाओं की मदद से इस बिल को तैयार किया है.

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