कहानी उन देहाती औरतों की जिन्हें नेसडेक्स ने माना वायदा कारोबार का एक्सपर्ट

बासुमित्र

सात सितंबर की उस शाम को धमदाहा की लाल देवी और शमशीदा खातून कभी भूल नहीं सकतीं. नई दिल्ली के ताजमहल होटल में उन्हें रामविलास पासवान और अर्जुन मेघवाल जैसे केंद्रीय मंत्री के हाथों पुरस्कृत होने का मौका मिला. और यह अवसर भी एक ऐसे काम के लिए जिसमें अर्थशास्त्र के बड़े-बड़े ज्ञाता दिमाग खपाते रहते हैं. नेशनल कमोडिटी एंड डेरिएटिव्स एक्सचेंज लिमिटेड (नेसडेक्स) ने इन्हें वायदा कारोबार में इनकी दक्षता और सूझबूझ के लिए कृषि प्रगति पुरस्कार से सम्मानित किया. ये औरतें भले ही बहुत पढ़ी लिखी न हों, मगर खरीद-बिक्री और कीमतों के आकलन में ये किसी से कम नहीं.
पिछले दो-तीन साल से ये अपने इलाके में उपजने वाले मक्के की खरीद करती हैं और उन्हें भंडारण कर तब बेचती हैं, जब इस फसल की कीमत बाजार में सर्वाधिक होती हैं. इस तरह अपनी सूझृबूझ से इनकी कंपनी अरण्यक एग्री प्रोड्यूसर लिमिटेड ने पिछले दो साल(2015-16 में) में 4078 मीट्रिक टन मक्के का कारोबार कर 42 लाख रुपये का मुनाफा कमाया है. इस साल अब तक वे 14 हजार मीट्रिक टन मक्का खरीद चुकी हैं.
कंपनी के सीइओ बताते हैं कि यह कंपनी पूर्णिया जिले के धमदाहा की उन महिलाओं की कंपनी है, जिनका इससे पहले किसी कंपनी चलाने का कोई अनुभव नहीं था. ये महिलाएं 2009 से स्वयं सहायता समूह बनाकर बचत करती थीं. 2016 में इन्होंने तय किया कि ये अपने इलाके में होने वाली नकदी फसल मक्का के खरीद-बिक्री का कारोबार करेंगी. इस इलाके में मक्के की खेती तो खूब होती है, मगर किसानों को कमी उचित मूल्य नहीं मिलता, इस वजह से वे हमेशा परेशान रहते हैं. इस लिहाज से यह बड़े जोखिम का काम था. मगर इन महिलाओं ने हिम्मत करके इस धंधे में हाथ डाल दिया. आज इनकी मेहनत सफल साबित हुई है.
इस कंपनी की कमान आज जीविका समूह की दस महिलाओं के हाथ में है. ये अब तक अपने साथ 122 मक्का उत्पाद समूहों को जोड़ चुकी हैं, कंपनी में आज की तारीख में 2600 शेयर होल्डर हैं. दिलचस्प है कि इस कंपनी ने अपने शेयर धारकों को 60 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बोनस भी बांटा है.
कंपनी की चेयरमैन लाल देवी हैं, कोषाध्यक्ष शमशीदा खातून और सचिव आशा देवी हैं. महज कुछ साल पहले तक ये महिलाएं घरेलू काम-काज और खेती-मजदूरी में व्यस्त रहती थीं आज ये एक कंपनी चला रही हैं. पहले स्थानीय लोग इनकी कोशिशों को गंभीरता से नहीं लेते थे. आज हर किसान अपना मक्का इसी कंपनी में बेचना चाहता है, क्योंकि कीमत ठीक-ठाक और समय से मिल जाता है.
लाल देवी कहती हैं, इस अवार्ड के मिलने से हम लोगों का हौसला बढ़ा है. हम बहुत जल्द इस काम को पूरे जिले में फैलाना चाहते हैं, ताकि हमारे साथ जुड़ी महिलाओं को भी लाभ हो और किसानों को भी. शमशीदा खातून उस क्षण के बारे में सोच कर भावुक हो जाती हैं जब नेसडेक्स के मंच पर उन्हें अपनी कंपनी को चलाने के अऩुभव के बारे में बोलने के लिए बुलाया गया था. इनके हौसले बुलंद हैं.

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