इंटरनेशनल होने की डगर पर पटना पुस्तक मेला, इस बार महिलाओं का रहेगा राज

सत्यम कुमार झा

इस बार का पुस्तक मेला एक अभ्यास है, व्यवस्थापक तैयारी कर रहे हैं, क्योंकि 25 वां पुस्तक मेला जो अगले साल लगेगा अन्तराष्ट्रीय होने वाला है. मुझे वैसे ही याद है कि इसी साल फरवरी में हुए पुस्तक मेला में माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आश्वासन दिया था कि अब पटना में अंतराष्ट्रीय पुस्तक मेला लगेगा. इसके लक्षण दिखने लगे है. इस बार खुद बिहार सरकार पुस्तक मेला में सहभागिता निभा रही है.

संभवतः इसी वजह से इस बार का पुस्तक मेला गांधी मैदान से हटकर ज्ञान भवन में शिफ्ट हो गया है. इसके साथ ही इस बार का बुक फेयर थीम बेस्ड है. थीम है नारी सशक्तीकरण. दो दिसंबर से शुरू होने वाला यह मेला 11 तारीख तक चलेगा, यानी पिछले बार से 2 दिन ज्यादा.

शुरुआत राजनीति में महिलाओं की कितनी दखल है, इस बात को लेकर होगी और विभिन्न तरह के प्रोग्राम होंगे. इस बार कविता पाठ में भी सिर्फ युवा कवित्रियों ही आमंत्रित किया गया है ताकि उन्हें ज्यादा मौका मिल सके. लंदन में हिंदी, गीताश्री से बातचीत और यात्रा पर गयी लड़की की दास्तान से लेकर कई तरह के कार्यक्रम का आयोजन किया गया है. अंतिम दिन “हिम्मत का रंग पिंक” नामक आयोजन है.

इस बार बिहार की दो महिला लेखिकाएं गीताश्री और निवेदिता की पुस्तकें मेला का खास आकर्षण रहेंगी. गीताश्री का उपन्यास हसीनाबाद और निवेदिता का काव्य संग्रहण हाल ही में प्रकाशित हुआ है. इसके अलावा मनीषा कुलश्रेष्ठ और शिखा वार्ष्णेय पहली बार पटना आ रही हैं. अनुसिंह चौधरी भी शिरकत करेंगी. आलोक धन्वा और संजय कुंदन की कविता कार्यशाला भी इस पुस्तक मेले की खासियत होगी.

आइये इस बार के कार्यक्रमों पर नजर डालते हैं.

 

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