आपको खबर भी है कि बचा है या एक्सपायर हो गया ‘मधुबनी पेंटिंग’ का जीआई टैग?

पुष्यमित्र

पिछले दिनों जहां रसगुल्ले का जीआई टैग हासिल करने के लिए बंगाल और ओड़िशा जैसे राज्यों के बीच अच्छी खासी जंग चली थी. देश के दूसरे राज्य जीआई टैग के लिए जान लड़ा रहे हैं. मगर बिहार राज्य की हालत यह है कि यहां मधुबनी पेंटिंग को मिला-मिलाया टैग दो साल पहले एक्सपायर हो चुका है और रिन्युअल कराने की बात तो दूर उद्योग निदेशालय के अधिकारियों को इस बारे में खबर भी नहीं हैं. बिहार की जिन पांच वस्तुओं को जीआई टैग मिला है, उनमें से तीन भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय की कोशिशों से मिला है, एक भागलपुर के तसर सिल्क डेवलपमेंट समिति की वजह से. बिहार सरकार की ओर से एक ही टैग के लिए आवेदन किया गया था, वह था मधुबनी पेंटिंग का जो एक्सपायर हो चुका है.
स्थानीय व्यवसाइयों की हितों की सुरक्षा के लिए भारत में जीआई टैग की रजिस्ट्री 2003 से ही हो रही है. 2005 में ही उद्योग विभाग ने बिहार की लोककला की वैश्विक पहचान मधुबनी पेंटिंग का जीआई टैग हासिल किया था. मगर दस वर्षों की अवधि के बाद 21 अगस्त, 2015 को यह टैग एक्सपायर कर गया. विभाग की ओर से इसके रिन्यू्अल की ठीक से कभी कोशिश नहीं की गयी. लिहाजा दो साल से यह टैग एक्सपायर है.
जीआई रजिस्ट्रार के दफ्तर से बिहार सरकार के उद्योग विभाग को भेजा गया पत्र.
इसके अलावा बिहार को चार और टैग हासिल हुए. ये एप्लीक वर्क, सुजनी एम्ब्रायोडरी, सिक्की ग्रास प्रोडक्ट और भागलपुर सिल्क हैं. इनमें से पहले तीन का जीआई टैग भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के आवदेन के जरिये बिहार सरकार को हासिल हुआ है. इसका रिन्युअल भी वस्त्र मंत्रालय द्वारा कराया जा चुका है. भागलपुर सिल्क का जीआई टैग भागलपुर तसर सिल्क डेवलपमेंट समिति के आवेदन पर हासिल हुआ है. यह टैग 2019 में एक्सपायर होगा.
जहां दूसरे राज्य 30-40 टैग तक हासिल कर चुके हैं. बिहार सरकार इस तरह के टैग हासिल करने में काफी सुस्त रहा है. रसगुल्ला की तर्ज पर सिलाव का खाजा, मनेर का लड्डू और गया के तिलकुट का जीआई टैग हासिल करने की बात की जाती रही है, मगर अब तक आवेदन नहीं किया गया है.
किसी वजह से चूक हो गयी है, हम रेन्युअल के लिए जल्द अप्लाई करेंगे- निदेशक
मधुबनी पेंटिंग से ही हमारी पहचान है. इसका जीआई टैग हमारे लिए महत्वपूर्ण है. इसी वजह से उद्योग निदेशालय ने यह टैग हासिल किया था. अब किसी वजह से इसके रिन्युअल का काम नहीं हो पाया है. हम जल्द से जल्द इसके लिए आवेदन करेंगे.
पंकज कुमार सिंह, निदेशक, उद्योग निदेशालय, बिहार सरकार
(प्रभात खबर में प्रकाशित)

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