आखिर क्या है मिथिला विकास बोर्ड, जिसके लिए जान लड़ा रहे हैं MSU के युवक

आज दरभंगा में MSU कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने जबरदस्त लाठी चार्ज किया. कई युवका बुरी तरह जख्मी हो गये. ये युवक पिछले कई दिनों से मिथिला विकास बोर्ड की मांग में यात्रा कर रहे थे. आज लाठी चार्ज के बाद कई लोग पूछ रहे हैं कि यह मिथिला विकास बोर्ड और उसकी मांग है क्या. इस बारे में MSU के राष्ट्रीय महासचिव आदित्य मोहन ने यह जानकारी हमें उपलब्ध करायी है.
आदित्य मोहन
हम क्या माँग रहे थे जिसके लिए हमें पुलिस की बर्बर लाठी का शिकार होना पड़ा ?
*भागलपुर में सिल्क उद्योग के लिए।
*सीतामढ़ी में जानकी यूनिवर्सिटी आ बेगुसराय में दिनकर यूनिवर्सिटी के स्थापना के लिए।
* दरभंगा-पूर्णिया-भागलपुर-मुजफ्फरपुर को हवाई यात्रा सुविधा से जोड़ने के लिए।
* मिथिला में सहरसा एम्स, आईआईटी, आईआईएम, आईटी एंड टेक्नोलॉजी पार्क की स्थापना, टेक्सटाइल पार्क की स्थापना के लिए।
* मिथिला में बंद पड़े चीनी मील-सूत मील-जुट मील-खाद मील-पेपर मील-खादी मील-सिल्क मील आदि उद्योग के रिवाइवल के लिए।
* समस्तीपुर, मुंगेर, सीतामढ़ी में गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेजों की स्थापना के लिए। उपलब्ध मेडिकल कॉलेजों एवम अस्पतालों के स्थिति में सुधार के लिए।
* सेंट्रल यूनिवर्सिटीज, गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेजों, स्पेशल एजुकेशन जोन की स्थापना के लिए। उपलब्ध यूनिवर्सिटीज के हालत में सुधार के लिए।
* खेती-किसानी को उन्नत बनाने के लिए। स्टेट बोरिंग, कोल्ड स्टोरेज, बेहतर सिंचाई-खाद-बीज-वैज्ञानिक पद्धति-उपकरणों की उपलब्धता के लिए। पशुपालन-मत्स्य पालन, मखाना उद्योग-लीची प्रसंस्करण उद्योग, कुक्कुट पालन, कृषि आधारित उद्योग और क्लस्टर बेस्ड एग्रीकल्चरल डेवलपमेंट को बढ़ावा देने के लिए।
* बेहतर रेलवे और रोड परिवहन सुविधा के लिए। कोशी, गंगा और अन्य नदीय क्षेत्रों में पुलों के ज्यादा निर्माण कर बेहतर कनेक्टिविटी के लिए।
* टूरिज्म-कल्चर-भाषा संवर्धन हेतु बेहतर बजट। मैथिली को द्वितीय राजभाषा के रूप में मान्यता। मैथिली को प्राथमिक शिक्षा में शामिल करने के लिए। मिथिलाक्षर-मैथिली रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट की स्थापना के लिए।
* क्षेत्र में कॉपरेटिव समूहों, महिला सहकारी समितियों के द्वारा गृह-कुटीर उद्योगों में बढ़ावा के लिए।
* बाढ़ और सुखाड़ के स्थायी निदान के लिए।

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