आईएस आतंकी क्यों बना रहे हैं 84 बांग्ला ब्लॉगरों की हिट लिस्ट?

कोलकाता स्टेशन के पास से मंगलवार को पकड़े गये आइएस से जुड़े आतंकियों ने कल एक सनसनीखेज खुलासा किया. उन लोगों ने बताया कि बांग्लादेशी आतंकी संगठन अंसार बांग्ला टीम ने 84 ऐसे ब्लॉगरों की सूची बनायी है जो बांग्लादेश या आसपास के इलाकों में रहते हैं. ऐसा लगता है कि ये तमाम ब्लॉगर बांग्ला में लिखने वाले होंगे. इन दोनों आतंकियों समेत कई आतंकियों को इन ब्लागरों के बारे में जानकारी जुटाने का काम सौंपा गया है. भले ही इस सूचना का संबंध हिंदी ब्लॉगरों से न हो या कोई भारतीय ब्लॉगर इस सूची में न भी हों तो भी यह बड़ी चिंताजनक बात है.

आखिर आइएस जैसे खतरनाक संगठनों की प्राथमिकता में ब्लॉगर जैसे निरीह प्राणी क्यों हैं? वैसे तो बांग्ला देश में 2013 के बाद से लगातार ब्लॉगरों की हत्या हुई है. इन ब्लॉगरों में ज्यादातर सेकुलर, अल्पसंख्यक और कट्टरपंथ का विरोध करने वाले हैं. 84 ब्लॉगरों की हिट लिस्ट के बारे में 2014 में भी एक बार खबर सामने आ चुकी है. उस सूची में भी ऐसे ही लोग हैं. अब तक 50 के करीब स्वतंत्र विचारकों की हत्या वहां हो चुकी है.

उदारवादियों और कट्टरपंथी विचारकों के बीच चल रही यह जंग हमें भारत में चल रही ऐसी ही जंग की याद दिलाती है, जिसे सोशल मीडिया पर हम आये दिनों देखते हैं. यह जंग क्रूरतम होती चली जा रही है. भारत में भी कई लोगों की सिर्फ इसलिए हत्या हो चुकी है क्योंकि वे अपनी राय खुल कर रख रहे थे. और उनकी राय से लोगों को परेशानी हो रही थी.

मौजूदा पद्मावती विवाद को भी इसी तर्ज पर देखा जा सकता है. दुनिया भर की खबरों पर निगाह डालने से समझ आता है कि कट्टरपंथ के उभार की यह प्रवृत्ति इंटरनेशनल ट्रेंड है. सच यह भी है कि कथनी और करनी में भारी अंतर और सिद्धांतों को अपने लाभ के लिए इस्तेमाल करने की प्रवृत्ति ने लोगों का उदारवाद से मोहभंग करा दिया है. समाज में उदारवाद को जगह न मिलना भी कट्टरपंथ के उभार का कारण है. वजह जो भी है, मगर कट्टरपंथ का समर्थन खतरनाक है, हमें तार्किक होना ही पड़ेगा. यही एकमात्र विकल्प है.

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