अरुणाचल प्रदेश की औरतों को क्या सिखा रही हैं पूर्णिया की ये ग्रामीण महिलाएं?

बासु मित्र

पूर्णिया जिले के विभिन्न गांवों की 12 महिलाएं हाल ही में अरुणाचल प्रदेश की एक माह की यात्रा करके लौटी हैं. दिलचस्प बात यह है कि ये औरतें घूमने फिरने के लिये वहां नहीं गयी थीं. इनकी यात्रा का मकसद वहां की औरतों को स्वयं सहायता समूह के प्रति जागरूक करना, उन्हें समूह बनाना सिखाना और समूहों को निर्माण करना था. इन दर्जन भर महिलाओं के लिए यह अनूठा अनुभव था. क्योंकि महज कुछ ही साल पहले तक इनमें से ज्यादातर महिलाएं गांव की देहरी भी नहीं लांघ पाती थीं, इनमें से कई ठीक से पढ़ी-लिखी भी नहीं हैं. मगर इनके बेहतरीन काम-काज की वजह से नेशनल रूरल लाइवलीहुड मिशन ने इन्हें इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी का मौका दिया.

मिशन द्वारा पूर्णिया जीविका के 15 सदस्यीय टीम को अरुणाचल प्रदेश में महिलाओं को समूह निर्माण और बुक कीपिंग से सम्बंधित प्रशिक्षण के लिए चयनित किया गया था, जिसमें जीविका समूह की 12 दीदियां और 3 बुक कीपर शामिल थे. जीविका दीदियों के इस समूह ने अरुणाचल प्रदेश के राज्य लाइवलीहुड मिशन के साथ मिलकर तीन जिले सियांग, रोइंग और नामसाईं जिले के 12 पंचायतों की महिलाओं को प्रशिक्षित देकर उन्हें समूह निर्माण के लिए जागरूक किया.

यह इन महिलाओं की पहली यात्रा नहीं थी, कुछ महिलाएं तो देश के सात अलग-अलग राज्यों में महिलाओं को समूह बनाने के लिए प्रेरित कर चुकी हैं. ऐसी ही एक महिला बीकोठी प्रखंड की कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन सुनीता देवी बताती हैं कि अरुणाचल प्रदेश में एक महीने का प्रशिक्षण कार्यक्रम अपने आप में शानदार अनुभव था. इस दौरान हम लोगों ने सबसे दुर्गम क्षेत्र सियांग जिले के पाइंग बी गये, जो एक हजार मीटर उंचे पहाड़ पर बसा था, गांव आने-जाने में 4 घंटे लग जाते थे. हमारी टीम ने वहां के गांवों की महिलाओं को समूह निर्माण के प्रति जागरूक करते हुए कई समूहों का निर्माण करवाया.

प्रशिक्षण के दौरान अपना अनुभव बताते हुए सुनीता कहती हैं कि पाइंग में मोबाइल नेटवर्क की समस्या काफी ज्यादा थी, समूह निर्माण के दौरान महिलाओं ने इस बात की काफी शिकायत की. बाद में इन प्रशिक्षक महिलाओं ने प्रखंड मुख्यालय जा कर वहां के बीडीओ और अन्य अधिकारीयों के सामने यह समस्या रखी. अधिकारियों ने जल्द ही वहां मोबाइल टॉवर लगाने का भरोसा दिलाया.

टीम में शामिल बनमनखी की रौनक परवीन बताती हैं कि अरुणाचल प्रदेश की महिलाएं काफी जागरूक है. बिहार और अरुणाचल का माहौल काफी अलग है. एक अन्य टीम की सदस्य धमदाहा दक्षिण की टिंकू देवी बताती हैं कि वहां की महिलाएं काफी एक्टिव हैं. हमारे यहां महिलाओं को घूंघट में रहना पड़ता है लेकिन वहां इस तरह को कोई पाबंदी नहीं है. काम के मामले में भी वह बिहार की महिलाओं से काफी बेहतर हैं. हालांकि उन्हें समूह निर्माण के बारे में उतनी जानकारी नहीं थी, फिर भी प्रशिक्षण के दौरन उन्होंने काफी ज्यादा उत्साह दिखाया.

जीविका के जिला परियोजना प्रबंधक सुनिर्मल गरेन बताते हैं कि यह हम लोगों के लिए बड़ी उपलब्धि है. यह बिहार की इकलौती टीम है जिसे दूसरे राज्य जाकर प्रशिक्षण देने का मौका मिल रहा है.

यह लोग टीम में शामिल थे

सुनीता देवी, रत्ना कुमारी, गीता देवी, सविता देवी, मधु देवी, बबली देवी, सुखिया देवी, पार्वती देवी, चंदा देवी, टिंकू देवी, विभा देवी, रौनक प्रवीण, बुक कीपरों में नीतीश कुमार, मुकेश कुमार मंडल, चन्दन कुमार भारती.

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